मैं जल धारा हूं (2) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 05, 2021 हूँ नम , विराट मेरा स्वरूप। मैं गतिमय, कभी नहीं सोती। जो पात्र पड़ा सागर तल में, उसके हृदय में में मोती।।2।। Read more
मैं जल धारा हूं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps February 05, 2021 पिघल पिघल कर अचल खंड से सागर तक मैं आई हूं। कठोरता से मृदुलता की मैं बजती शहनाई हूं मैं जलधारा हूँ © Read more