मैं जल धारा हूं

पिघल पिघल कर अचल खंड से 
सागर तक मैं आई हूं। 
कठोरता से मृदुलता की
 मैं बजती शहनाई हूं
 मैं जलधारा हूँ
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Kavitakul.blogspot.com

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